हाइपरलूप ट्रेन क्या है – Hyperloop train in Hindi

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एक छोटा सा आईडिया पूरी दुनिया को बदल सकता है और आज हम बात करेंगे उसी आइडिया के बारे में नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज के नए आर्टिकल में ,आज के इस सुपरफास्ट लाइफ में टाइम की वैल्यू काफी ज्यादा बढ़ गई है टाइम को ट्रैफिक जाम जैसी सिचुएशंस में वेस्ट होने से बचाने के लिए नए नए वाहन और तरीके भी आ रहे हैं तभी तो हम बैलगाड़ी से बुलेट ट्रेन और मैग्लेव ट्रेन तक का सफर तय कर पाए हैं।

और अभी इससे भी आगे निकल जाने की तैयारी का नाम है हाइपरलूप ,यह हाइपरलूप टेक्नोलॉजी बहुत ही नई और काफी रोमांचक है इसके बारे में जानने के बाद आप सोचने लगेंगे कि क्या वाकई में अब बहुत जल्दी ही एक ऐसे वाहन में बैठ सकेंगे जो बुलेट ट्रेन की स्पीड को भी मात दे देगा और उसका स्ट्रक्चर और उसकी जर्नी भी कितनी एक्साइटिंग होगी इसलिए आज हम इस आर्टिकल में हाइपरलूप टेक्नोलॉजी से जुड़ी सभी जानकारियों की बात करेंगे क्योंकि बहुत ही इंटरेस्टिंग होने के साथ काफी इनोवेटिव भी है।

हाइपरलूप क्या है

अभी तक दुनिया में 4 तरीके से ट्रांसपोर्टेशन किया जाता है जल में ,थल में ,वायु में, और हवा में, लेकिन हाइपरलूप एक ऐसा 5 वां ट्रांसपोर्टेशन मीडियम बनने जा रहा है जिसमें हम निर्वात में सफर करेंगे

हाइपरलूप एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जोकि रेगुलर वाहन में आने वाले दो ऐसे मेजर प्रॉब्लम को दूर करती है जिनसे वाहन की गति बहुत कम हो जाती है और यह प्रॉब्लम है फ्रिक्शन और एयर रेजिस्टेंस तो इस टेक्नोलॉजी में फ्रिक्शन और एयर रेजिस्टेंस की प्रॉब्लम दूर होने से सुपर फास्ट स्पीड हासिल की जा सकती है बिल्कुल हाइपरलूप की तरह है आप जानते हैं कि हाइपर लोग दिखते कैसे हैं हाइपरलूप एक लंबी वेक्यूम ट्यूब होती है और कैप्सूल जैसे कंपार्टमेंट होते हैं जिन्हें पाट कहा जाता है यह पोर्ट्स वेक्यूम ट्यूब के अंदर हाई स्पीड से चलते हैं इन ट्यूब्स को लुक कहा जाता है क्योंकि इस टेक्नोलॉजी में ट्रांसपोर्ट लूप में ही होता है इसीलिए इसे इस टेक्नोलॉजी को हाइपरलूप टेक्नोलॉजी नाम दिया गया हैइमेजिन करके देखिए कि आप स्टील के बने एक वेक्यूम ट्यूब में बैठे हैं और सुपर फास्ट स्पीड से एक लुक में सफर कर रहे हैं सोचने में ही कितना एक्साइटिंग है ना क्योंकि अभी तक आपने भी केवल साइंस लैब में ही वैक्यूम बनाने का प्रोसेस देखा होगा वैक्यूम का मतलब तो आप समझ ही गए होंगे वैक्यूम यानी निर्वात ऐसी सिचुएशन जिसमें हवा ना हो और इस टेक्नोलॉजी की यही तो अनोखी बात है कि जिस वेक्यूम ट्यूब में कोर्ट में बैठकर आप सफर करेंगे उसमें बहुत ही कम हवा होगी इस वेक्यूम ट्यूब में पूरी हवा नहीं निकाली जाती बल्कि थोड़ी हवा इसी में रहती है और हवा कम होने से फ्रिक्शन भी कम हो जाता है और स्पीड भी बढ़ाने के लिए एनर्जी की जरूरत भी कम पड़ती है

हाइपरलूप कैसे काम करता है

आप एक जगह से दूसरी जगह यात्रा कर सके इसके लिए एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट तक एक बहुत लंबी ट्यूब यूज की जाती है जो कलर्स पर टिकी हुई होती है इस ट्यूब में छोटे-छोटे थॉट इंडिविजुअल ट्रैवल करते हैं और इंपोर्ट्स में बैठ कर बैठ कर एक जगह से दूसरी जगह पहुंच पाते हैं जैसे कि बस ट्रेन या प्लेन में बैठ कर पहुंचते हैं हाइपरलूप में 2 तरीके की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती हैं मैग्नेटिक लैविटेशन जाने की चुंबकीय उत्तोलन और एयर प्रेशर इन की वजह से पोट और ट्यूब के बीच में फ्रिक्शन नहीं होता जिससे पोर्ट की स्पीड इतनी फास्ट हो जाती है कि मैग्लेव ट्रेन की भी स्पीड को बहुत पीछे छोड़ देती है और आप यह सुनकर चौक जायेंगे कि हाइपरलूप टेक्नोलॉजी में स्पीड 760 एमपीएच माइल्स पर आवर मतलब 1200 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर रहती है और इस स्पीड से तो साउंड चलता है मतलब इसकी गति ध्वनि की गति से चलने वाला यह हाइपरलूप अभी तक का सुपर फास्ट स्पीड को अचीव करने का दम रखता है और दिलचस्प बात तो यह भी है कि वेक्यूम ट्यूब में चलने वाले वोट पर दो फोर्स लगते हैं मैग्नेटिक फोर्स और एयर फोर्स जो ना केवल पॉट को वेक्यूम ट्यूब में आगे बढ़ाते हैं बल्कि हवा में भी उठा देते हैं हर पल लोग को इस तरीके से भी समझ सकते हैं कि मैग्लेव ट्रेन में मैग्लेव मैग्नेट के सारे ट्रेन अपने ट्रैक पर चलती है जिससे ट्रेन और पटरी के बीच में फ्रिक्शन कम होता है और उसकी स्पीड बहुत बढ़ जाती है हाय हाइपरलूप एक ऐसी एडवांस ट्रेन है जिसे निर्वात में चलाया जाएगा

कौन है वह आदमी जिसके दिमाग में यह कमाल का इनोवेटिव आइडिया आया हाइपरलूप का यह आईडिया लगभग 200 साल पुराना है 1799 में ब्रिटिश इनवर्टर जॉर्ज में डसले ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के तौर पर एक एयर प्रोपल्शन ट्यूब का पेटेंट करवाया था और उसके इतने साल बाद 2013 में टेस्ला मोटर्स और स्पेसएक्स के सीईओ एलोन मस्क ने हाइपर लोग का डिजाइन पेश किया उनके इस आईडिया और डिजाइन को पूरी दुनिया से पॉजिटिव रिस्पांस मिला एलोन मस्क का कहना है की पोर्ट्स ट्रेन से ज्यादा फास्ट होंगे कार से ज्यादा सुरक्षित होंगे और एयरक्राफ्ट की तुलना में इन्वायरमेंट को कब नुकसान पहुंचाएंगे एलोन मस्क का यह आइडिया यानी हाइपर लोग एक ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी है इसका मतलब यह हुआ कि हाइपरलूप बनाने का राइट एलॉन मुस्क ने सबके सामने साथ शेयर किया है ताकि हाइपर लोग बनाने का काम प्रोग्रेसिव रहे और जल्दी से जल्दी हाइपर लोग दुनिया के सामने आ सके उसी का नतीजा है कि आज बहुत सारी कंपनियां हाय परलोक बनाने में जुट गई है जैसे कि वर्जिन हाइपरलूप वन एसटीडी ट्रांसपोर्ट और एरीवो जैसी कंपनियां हाइपरलूप बनाने का फंडामेंटल आईडिया तो इन कंपनियों का सेम ही रहेगा लेकिन इसे बनाने में यूज होने वाले टेक्नोलॉजी में थोड़ा-थोड़ा डिफरेंस जरूर देखने को मिलेगा यानी हल्के से ट्विस्ट के साथ बहुत जल्दी बहुत से है पर लोग हमारे सामने होंगे और अभी वर्जन हाइपरलूप वन प्राइवेट कंपनी हाइपरलूप प्रोजेक्ट को बहुत जल्द साल 2021 तक 22:00 तक शुरू करने का इरादा रखती है फलों के बारे में

हाइपरलूप टेक्नोलॉजी कहां कहां शुरू होगी
इतना सब कुछ जानने के बाद आपके मन में यह सवाल तो जरूर आ रहा होगा कि हम हाय पर लोग को कब देख पाएंगे और या कहां-कहां किस किस किस देश में शुरू होगी हाइपरलूप टेक्नोलॉजी का आईडिया भले ही कई सालों पहले आ चुका था लेकिन अभी भी इस टेक्नोलॉजी को अपडेट करने के लिए उस पर काम जारी है और माना जा रहा है कि 2022 में हाई पर लोग सबके सामने आ जाएगा फिर हाल हाय पर लोग के कई सारे रूट डिसाइड हुए हैं जिनमें से कुछ रूट है न्यूयॉर्क सिटी से वाशिंगटन सिटी तक पुणे से मुंबई तक कंसास सिटी से सेंट लुइस और विजयवाड़ा से अमरावती।

हाइपरलूप टेक्नोलॉजी के फायदे
हाइपरलूप के रूट्स जानने के बाद अब हम बात करेंगे कि हाय पर लोग के फायदे कौन-कौन से हैंहाइपरलूप फास्टेस्ट ट्रेन से भी बहुत फास्ट है यानी कि हम घंटों का सफर मिले तो मैं पूरा कर सकते हैं इस में बैठने के बाद आप डायरेक्ट अपने डेस्टिनेशन पर ही पहुंचेंगे क्योंकि अन्य ट्रेनों की तरह यह बीच-बीच में स्टॉपेज पर नहीं रुकेगी इसका कोई टाइम टेबल यह शेड्यूल भी नहीं होगा बल्कि जब आप तैयार होंगे तभी पोर्ट में बैठकर अपनी डेस्टिनेशन तक आप मिनटों में पहुंच पाएंगे देखने में भले ही है बहुत ही एक्सपेंसिव टेक्नोलॉजी लगती है लेकिन बाकी सुपरफास्ट ट्रेन के तुलना में इसकी कॉस्ट बहुत कम होगी और जब कॉस्ट कम होगी तो टिकट की कॉस्ट भी बुलेट ट्रेन की तुलना में काफी कम होगी इसमें लो पावर कंजप्शन होगा यह हाइपरलूप अर्थक्वेक और बेड वेदर कंडीशन में भी सुरक्षित रहेगा यह इन्वायरमेंट फ्रेंडली है यानी इससे ना तो धोनी प्रदूषण होगा और ना ही वेस्ट प्रोडक्ट निकलेंगे।

हाइपरलूप टेक्नोलॉजी के साइड इफेक्ट

हाइपरलूप के पाट में बहुत कम स्पेस होने के कारण अंदर मूवमेंट करना मुश्किल होगा इसकी स्पीड इतनी फास्ट होगी कि आपका सिर भी चकरा सकता है शुरुआत में हो सकता है कि इस टेक्नोलॉजी की एंप्यूटेशन के लिए बहुत से पेड़ काटने पड़े हैं ऐसा हुआ तो इन्वायरमेंट के लिए बहुत ही नुकसानदायक होगा इस प्रकार हाइपरलूप के एडवांटेज इसके साथ डिसएडवांटेज भी हैं लेकिन अभी इस टेक्नोलॉजी के रियल वर्ल्ड में आने के लिए इसके सामने बहुत से चैलेंज है जैसे कि एक्सपेंसिव इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपेंशन इशू यानी टेंपरेचर एटमॉस्फेयर चेंज होने पर वेक्यूम ट्यूब के फैलने या सिकुड़ जाने का रिस्क और वैक्यूम में सफर करना हाइपरलूप से जुड़े इन चैलेंज इसको क्लियर करने के बाद या टेक्नोलॉजी चालू की जाएगी।

लेकिन क्या आपको पता है कि हाइपरलूप में वोट के अंदर बैठ कर के आप कैसा महसूस करेंगे तो इस में बैठने के बाद आपको वैसा ही फील होगा जैसा कि आप एक एलिवेटर या पैसेंजर प्लेन में बैठते समय होता है लेकिन आपका एक्साइटमेंट लेवल जरूर बहुत ही रहेगा क्योंकि आप जमीन पर रहते हुए हवाई जहाज से भी तेज गति में ट्रेवल कर पाएंगे हालांकि अभी हाइपरलूप टेक्नोलॉजी को डिवेलप होने और सिक्योर होने में थोड़ा समय जरूर लगेगा लेकिन उसके बाद आप रियल संसार में इमैजिनेशन का आनंद उठा सकते हैं।